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जोशीमठ – जब पहाड़ खुद दरकने लगे

उत्तराखंड का जोशीमठ…
जहाँ कभी मंदिरों की घंटियाँ और पहाड़ों की शांति गूंजती थी,
आज वहाँ दरारों की आवाज़ सुनाई देती है।

यह केवल एक कस्बे की कहानी नहीं है—
यह हिमालय की उस चुप चेतावनी की आवाज़ है, जिसे हमने सालों तक अनसुना किया।

जोशीमठ का सैटेलाइट इमेज दिखाता subsidence
ISRO सैटेलाइट इमेज: जोशीमठ में तेज़ subsidence (2023)
स्रोत: Hindustan Times
सैटेलाइट इमेज जोशीमठ sinking town
सैटेलाइट इमेज से जोशीमठ का 'sinking town' बनना
स्रोत: Swarajya Mag

जोशीमठ कहाँ और क्यों इतना महत्वपूर्ण है?

जोशीमठ चमोली ज़िले में, लगभग 1,890 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।
यह बद्रीनाथ धाम का प्रवेश द्वार है और आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित ज्योतिर्मठ का केंद्र।

धार्मिक, सामरिक और भौगोलिक—तीनों दृष्टि से यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील है।

दरकती ज़मीन की शुरुआत

2022–23 में जोशीमठ के सैकड़ों घरों, सड़कों और मंदिरों में गहरी दरारें दिखने लगीं।

  • 800 से अधिक इमारतें प्रभावित (2023 तक 868+ संरचनाएँ; बाद में और बढ़ा)
  • हज़ारों लोग विस्थापन के कगार पर
  • पूरे इलाके को “unsafe zone” घोषित किया गया
  • 2022-2024 तक कुछ हिस्सों में 30 cm से ज्यादा धंसाव (2025 तक जारी)
जोशीमठ में घरों पर दरारें
जोशीमठ में दरारें और प्रभावित घर
स्रोत: Al Jazeera
प्रभावित इमारतें जोशीमठ
घरों और सड़कों में गहरी दरारें
स्रोत: CNN
जोशीमठ cracks in roads
सड़कों और घरों में दरारें
स्रोत: NDTV

वैज्ञानिक क्या कहते हैं?

वैज्ञानिकों के अनुसार, जोशीमठ एक प्राचीन landslide debris पर बसा हुआ है—
यानी यह इलाका ठोस चट्टान नहीं, बल्कि ढीले मलबे पर टिका है।

1976 की मिश्रा समिति रिपोर्ट पहले ही चेतावनी दे चुकी थी। ISRO रिपोर्ट (2023): सिर्फ 12 दिनों में 5.4 cm subsidence।

एरियल व्यू जोशीमठ landslide debris
जोशीमठ का एरियल व्यू दिखाता ancient landslide debris
स्रोत: AGU Landslide Blog

अवैज्ञानिक विकास – सबसे बड़ा कारण

बड़े होटल, चौड़ी सड़कें, सुरंगें और जलविद्युत परियोजनाएँ बिना पहाड़ की सहनशक्ति सोचे बनाई गईं। NTPC की तपोवन-विष्णुगढ़ परियोजना पर आरोप (हालांकि NTPC इनकार करता है)।

प्रभावित मंदिर जोशीमठ
मंदिरों और इमारतों में दरारें
स्रोत: Frontline/The Hindu

पानी – जो जीवन देता है, वही ज़मीन को डुबो गया

बारिश और पाइपलाइन का पानी मलबे में समाकर फिसलन पैदा करता है। खराब ड्रेनेज मुख्य कारण।

हिमालय क्यों इतना नाज़ुक है?

हिमालय सबसे युवा पर्वत श्रृंखला है, हर साल मिलीमीटर खिसकता है, Zone V में।

मानव त्रासदी

लोगों को घर छोड़ने पड़े, मंदिरों में ताले लगे, पीढ़ियों का जीवन उजड़ा।

क्या यह आखिरी चेतावनी है?

अगर विकास मॉडल नहीं बदला तो मसूरी, नैनीताल आदि भी खतरे में। 2025 तक subsidence जारी (DownToEarth रिपोर्ट)।

सबक जो हमें सीखना होगा

सच्ची प्रगति वही है जो विज्ञान और प्रकृति—दोनों के साथ चले।
पहाड़ चुप रहते हैं… लेकिन सहते नहीं।

जोशीमठ हमें याद दिलाता है कि अगर हमने हिमालय को नहीं बचाया, तो हिमालय हमें बचाने नहीं आएगा।

संकलन: विभिन्न समाचार और वैज्ञानिक स्रोतों से (2023-2025)
मुख्य स्रोत: Nature Scientific Reports (2024), DownToEarth (2025), ISRO, Hindustan Times, CNN, Al Jazeera आदि।