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वर्तमान तिथि: 28 दिसंबर 2025 | वैश्विक CO₂ स्तर: लगभग 427-430 ppm (NOAA Mauna Loa Observatory और Scripps डेटा से, 2025 में रिकॉर्ड बढ़ोतरी)
मानव गतिविधियों से CO₂ बढ़ रहा है, जो ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण है। भारत में 2025 में 334 में से 331 दिनों एक्सट्रीम मौसम घटनाएं हुईं – हीटवेव्स, बाढ़, लैंडस्लाइड आदि।
NASA के OCO-2 सैटेलाइट और GEOS मॉडल से बने विज़ुअलाइज़ेशन दिखाते हैं कि CO₂ उत्तरी गोलार्ध में ज्यादा जमा है, हवाओं से घूमती है और सतह के करीब केंद्रित रहती है।
स्रोत: NASA Scientific Visualization Studio - लिंक
स्रोत: NASA SVS - लिंक
स्रोत: NASA SVS - लिंक
स्रोत: NASA SVS - लिंक
भारत में CO₂ उत्तर भारत (इंडो-गैंगेटिक प्लेन), औद्योगिक क्षेत्रों (गुजरात, महाराष्ट्र) और कोयला खदान वाले इलाकों में ज्यादा है। सैटेलाइट डेटा से क्षेत्रीय अंतर साफ दिखता है।
स्रोत: ScienceDirect (Satellite Data Study) - लिंक
स्रोत: Ars Technica - लिंक
स्रोत: AGU Journals - लिंक
मुख्य कारण: जीवाश्म ईंधन जलाना (कोयला, पेट्रोल, गैस), जंगलों की कटाई, उद्योग और कृषि। 1750 से CO₂ स्तर 280 ppm से बढ़कर 427+ ppm हो गया है।
स्रोत: Emission Index - लिंक
स्रोत: NASA OCO-2 - लिंक
स्रोत: FairPlanet - लिंक
CO₂ और अन्य ग्रीनहाउस गैसें सूर्य की गर्मी को वायुमंडल में फंसाती हैं, जिससे पृथ्वी गर्म होती है। मानव उत्सर्जन से यह प्रभाव बढ़ गया है।
स्रोत: Smith College Climate Literacy - लिंक
स्रोत: Science Learning Hub - लिंक
स्रोत: ResearchGate - लिंक
2025 में भारत में रिकॉर्ड हीटवेव्स (50°C तक), बाढ़-लैंडस्लाइड, हिमालयी ग्लेशियर पिघलना, समुद्र स्तर बढ़ना। लाखों प्रभावित, फसलें बर्बाद, मौतें बढ़ीं।
स्रोत: Outlook India
स्रोत: The United Indian
स्रोत: National Maritime Foundation - लिंक
स्रोत: Indiatimes
स्रोत: CGTN Europe