मध्य प्रदेश – भारत का वन राज्य
मध्य प्रदेश, जिसे भारत का हृदय स्थल कहा जाता है,
अपनी विशाल वन संपदा के कारण "भारत का वन राज्य" कहलाता है।
यहाँ के जंगल न केवल प्राकृतिक सुंदरता का प्रतीक हैं,
बल्कि भारत की पारिस्थितिकी, जलवायु संतुलन और जैव विविधता की रीढ़ भी हैं।
🌿 क्या आप जानते हैं?
मध्य प्रदेश में भारत का सबसे बड़ा निरंतर वन क्षेत्र पाया जाता है।
घना सागवान वन परिदृश्य
स्रोत: Krishi Jagran
वन क्षेत्र और कवरेज
FSI (Forest Survey of India) के अनुसार,
मध्य प्रदेश का कुल रिकॉर्डेड वन क्षेत्र लगभग
94,689 वर्ग किलोमीटर है।
वास्तविक वन आवरण (Forest Cover)
77,482 वर्ग किलोमीटर है,
जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 25% है।
- आरक्षित वन: 61,886 वर्ग किमी
- संरक्षित वन: 31,098 वर्ग किमी
- अनवर्गीकृत वन: 1,705 वर्ग किमी
वनों के प्रकार
भौगोलिक और जलवायु विविधता के कारण
मध्य प्रदेश में विभिन्न प्रकार के वन पाए जाते हैं:
- उष्णकटिबंधीय नम पर्णपाती वन: साल, सागवान, बांस
- उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन: तेंदू, महुआ, पलाश
- सागवान वन: राज्य के वन क्षेत्र का लगभग 19.36%
- मिश्रित वन: जैव विविधता से भरपूर
वन ह्रास – कितना जंगल कट चुका है?
2019 से 2023 के बीच मध्य प्रदेश में
600+ वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र नष्ट हुआ।
यह क्षेत्रफल लगभग इंदौर शहर के बराबर है।
वन ह्रास के प्रमुख कारण:
- अवैध लकड़ी कटाई
- खनन और औद्योगिक परियोजनाएं
- सड़क, डैम और रेलवे निर्माण
- तेजी से बढ़ता शहरीकरण
⚠️ जंगल कटने से बाढ़, सूखा, तापमान वृद्धि और
वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं।
वन्यजीव और राष्ट्रीय उद्यान
मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट ऑफ इंडिया भी कहा जाता है।
यहाँ भारत के लगभग 13% बाघ पाए जाते हैं।
- बाघ, तेंदुआ, भालू
- बारासिंगा (राज्य पशु)
- हाथी, जंगली सूअर
- 300+ पक्षी प्रजातियाँ
वनों का महत्व
वन केवल पेड़ नहीं होते, बल्कि जीवन प्रणाली होते हैं।
मध्य प्रदेश के जंगल:
- कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करते हैं
- वर्षा चक्र को नियंत्रित करते हैं
- मिट्टी कटाव रोकते हैं
- लाखों आदिवासियों की आजीविका हैं
संरक्षण प्रयास
राज्य और केंद्र सरकार द्वारा कई संरक्षण योजनाएं चलाई जा रही हैं:
- प्रोजेक्ट टाइगर
- प्रोजेक्ट एलीफेंट
- जॉइंट फॉरेस्ट मैनेजमेंट (JFM)
- सामुदायिक वन संरक्षण
🌱 संदेश:
वन बचेंगे तभी भविष्य बचेगा।
वन = पानी + हवा + जीवन
संदर्भ: FSI रिपोर्ट, MP Forest Department
अंतिम अपडेट: जनवरी 2026