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बारिश से पहले पक्षी ज़्यादा शोर क्यों मचाते हैं?

बारिश की बूंदें गिरने से ठीक पहले या बादल छाए रहने पर अक्सर पक्षी अचानक ज़्यादा तेज़ चहचहाने, चिल्लाने या शोर मचाने लगते हैं। कई लोग इसे "बारिश का संकेत" मानते हैं और कहते हैं कि पक्षी मौसम का पूर्वानुमान कर लेते हैं। लेकिन क्या यह सच है? वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चलता है कि हां, पक्षी मौसम के बदलाव को बहुत संवेदनशीलता से महसूस करते हैं, लेकिन कारण सिर्फ "बारिश आने की खुशी" नहीं हैं – बल्कि कई वैज्ञानिक और व्यवहारिक वजहें हैं।

मुख्य वैज्ञानिक कारण

  1. बैरोमेट्रिक प्रेशर (वायुमंडलीय दबाव) में कमी
    बारिश या तूफान आने से पहले वायुमंडलीय दबाव (barometric pressure) तेजी से गिरता है। पक्षियों के कान, खोपड़ी और पाइनियल ग्लैंड में छोटे-छोटे सेंसर होते हैं जो इस बदलाव को महसूस कर लेते हैं। यह बदलाव उन्हें "खतरा" या "मौसम खराब होने" का संकेत देता है।
    नतीजा: पक्षी तुरंत ज़्यादा सक्रिय हो जाते हैं – या तो टेरिटरी (क्षेत्र) की रक्षा के लिए गाना गाते हैं, या साथी पक्षियों को चेतावनी देते हैं। कई अध्ययनों (जैसे BirdWatching Daily और Michele Gargiulo की रिसर्च) में पाया गया कि प्रेशर ड्रॉप पक्षियों में हार्मोनल बदलाव (जैसे glucocorticoids) ट्रिगर करता है, जिससे वे ज़्यादा vocal हो जाते हैं।
  2. ह्यूमिडिटी (नमी) में वृद्धि और ध्वनि प्रसारण
    बारिश से पहले हवा में नमी बहुत बढ़ जाती है। नम हवा में ध्वनि तेज़ और दूर तक स्पष्ट रूप से यात्रा करती है (sound travels faster and farther in humid air)। पक्षी इसका फायदा उठाते हैं – वे ज़्यादा तेज़ और लंबे गाने गाते हैं ताकि उनकी आवाज़ दूर तक पहुंचे।
    यह समय उनके लिए "परफेक्ट" होता है क्योंकि बाद में बारिश और हवा में ध्वनि विकृत हो जाती है। इसलिए वे "अब गाओ" का फैसला करते हैं।
  3. तूफान या बारिश से पहले तैयारी और टेरिटरी डिफेंस
    पक्षी जानते हैं कि बारिश में उड़ना मुश्किल हो जाता है, भोजन ढूंढना कम होता है, और खतरा बढ़ जाता है। इसलिए वे पहले से:
    - टेरिटरी मजबूत करते हैं (अपने क्षेत्र की रक्षा के लिए ज़्यादा गाते हैं)।
    - साथी या बच्चे को इकट्ठा करने की कोशिश करते हैं।
    - कीड़ों की गतिविधि बढ़ने पर (जो नमी में ज़्यादा उड़ते हैं) भोजन का फायदा उठाते हैं।
    कई प्रजातियां (जैसे sparrows, robins, crows) तूफान से पहले ज़्यादा vocal होती हैं ताकि "एक आखिरी बार" गा सकें या संदेश पहुंचा सकें।
  4. इंफ्रासाउंड और अन्य संकेत
    तूफान से पहले इंफ्रासाउंड (बहुत कम फ्रीक्वेंसी वाली ध्वनियां) उत्पन्न होती हैं, जो पक्षी महसूस कर लेते हैं। यह उन्हें बेचैन कर देता है और vocalization बढ़ा देता है।

क्या यह हमेशा होता है? मिथक और सच्चाई

एक आम मिथक है कि "बारिश से ठीक पहले पक्षी चुप हो जाते हैं" – लेकिन वास्तव में कई बार वे पहले ज़्यादा शोर मचाते हैं, और बारिश शुरू होने पर चुप हो जाते हैं (क्योंकि वे आश्रय ले लेते हैं और ऊर्जा बचाते हैं)।
- हल्की बारिश में पक्षी गाना जारी रख सकते हैं।
- तेज़ तूफान या भारी बारिश में वे चुप हो जाते हैं।
यह व्यवहार प्रजाति पर निर्भर करता है – कुछ पक्षी (जैसे कोयल, मोर, या भारतीय ग्रामीण क्षेत्रों में आम पक्षी) बारिश से जुड़े गाने गाते हैं।

उदाहरण और भारतीय संदर्भ

भारत में मानसून से पहले कौवे, कोयल, मैना और घरेलू चिड़ियां ज़्यादा शोर मचाती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह नमी और प्रेशर बदलाव का असर है। वरणासी जैसे इलाकों में गंगा किनारे या पार्कों में यह व्यवहार बहुत आम है।

निष्कर्ष

पक्षी बारिश से पहले ज़्यादा शोर इसलिए मचाते हैं क्योंकि वे मौसम के सूक्ष्म बदलावों (प्रेशर ड्रॉप, ह्यूमिडिटी, ध्वनि प्रसारण) को बेहद संवेदनशीलता से महसूस करते हैं। यह कोई जादू नहीं, बल्कि लाखों सालों की विकास प्रक्रिया है जो उन्हें जीवित रहने में मदद करती है। अगली बार जब बादल छाएं और पक्षी ज़ोर-ज़ोर से चहचहाएं, तो समझ लीजिए – प्रकृति अपना अलार्म बजा रही है!

स्रोत: BirdWatching Daily, Michele Gargiulo रिसर्च, BBC Weather, National Audubon Society, और हालिया 2025 अध्ययन (barometric pressure और avian behavior पर)।