जानवर भूकंप से पहले खतरा कैसे भांप लेते हैं?
भूकंप आने से पहले कई बार देखा गया है कि जानवर अचानक बेचैन हो जाते हैं – कुत्ते भौंकने लगते हैं, बिल्लियां छिप जाती हैं, पक्षी घोंसले छोड़कर उड़ जाते हैं, सांप बिलों से बाहर निकल आते हैं, और मछलियां पानी में उछलने लगती हैं। यह घटना सदियों पुरानी है। 373 ईसा पूर्व ग्रीस में हेलिस शहर के भूकंप से पहले चूहे, सांप और कीड़े शहर छोड़कर भाग गए थे। आज भी जापान, चीन, भारत और अन्य भूकंप-प्रवण क्षेत्रों में लोग ऐसे व्यवहार को "प्रकृति का अलार्म" मानते हैं। लेकिन क्या जानवर वाकई भूकंप "भविष्यवाणी" करते हैं? वैज्ञानिकों ने इस पर गहन अध्ययन किया है और कई ठोस कारण सामने आए हैं।
वैज्ञानिक कारण – जानवर कैसे खतरा महसूस करते हैं?
- P-वेव्स (प्राथमिक तरंगें) का तुरंत पता लगाना
भूकंप में सबसे पहले P-वेव्स (Primary या Compressional waves) निकलती हैं, जो S-वेव्स (जो मुख्य विनाशकारी कंपन पैदा करती हैं) से 1.7 गुना तेज चलती हैं। इंसान इन्हें आमतौर पर महसूस नहीं करते, लेकिन कई जानवरों की संवेदनशील इंद्रियां (कान, पैरों की त्वचा, या विशेष अंग) इन हल्की कंपनों को सेकंड्स पहले पकड़ लेती हैं।
उदाहरण: कुत्ते, घोड़े, पक्षी और यहां तक कि मछलियां भी इन तरंगों से प्रभावित होकर बेचैन हो जाती हैं। USGS के अनुसार, यह अंतर सेकंड्स से मिनटों तक का होता है। - इंफ्रासाउंड (बहुत कम फ्रीक्वेंसी वाली ध्वनियां)
भूकंप से पहले या दौरान पृथ्वी की गहराई से इंफ्रासाउंड तरंगें (20 Hz से कम) निकलती हैं, जो इंसान नहीं सुन सकता लेकिन जानवर महसूस कर लेते हैं।
हाथी, कबूतर, जिराफ और कुछ स्तनधारी इन तरंगों को पैरों या पूरे शरीर से डिटेक्ट करते हैं। ये तरंगें सैकड़ों किलोमीटर दूर तक फैल सकती हैं, इसलिए जानवर घंटों पहले भी बेचैन हो सकते हैं। - विद्युत-चुंबकीय क्षेत्र में बदलाव
टेक्टॉनिक प्लेट्स पर दबाव पड़ने से चट्टानों में "positive holes" नामक चार्ज्ड पार्टिकल्स निकलते हैं, जो हवा में आयन बनाते हैं और अल्ट्रा-लो फ्रीक्वेंसी electromagnetic waves पैदा करते हैं।
कई पक्षी (जैसे कबूतर) क्रिप्टोक्रोम प्रोटीन से चुंबकीय क्षेत्र महसूस करते हैं, और अन्य जानवर इन बदलावों को "अजीब अनुभूति" के रूप में पकड़ लेते हैं। 2010-2013 के अध्ययनों में यह साबित हुआ है कि ये सिग्नल भूकंप से पहले हवा में फैलते हैं। - रेडॉन गैस और अन्य रासायनिक बदलाव
चट्टानों पर दबाव से रेडॉन गैस, कार्बन डाइऑक्साइड या अन्य गैसें निकलती हैं, जो जानवरों की सूंघने की क्षमता से पकड़ी जाती हैं।
चूहे, सांप, कीड़े और कुछ पक्षी इन गैसों से प्रभावित होकर भागते हैं। भूजल में रासायनिक बदलाव भी मछलियों को उछलने पर मजबूर करते हैं। - ग्रुप बिहेवियर और संचार
मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल बिहेवियर (2020) की रिसर्च में इटली के एक फार्म पर गायों, भेड़ों और कुत्तों पर सेंसर लगाए गए। पाया गया कि भूकंप से 1-20 घंटे पहले जानवर असामान्य रूप से सक्रिय हो जाते हैं (45 मिनट से ज्यादा लगातार मूवमेंट)।
एक जानवर बेचैन होता है तो दूसरा उससे प्रभावित होकर और ज्यादा बेचैन हो जाता है – यह "म्यूचुअल इन्फ्लुएंस" या सामूहिक संकेत है।
वास्तविक उदाहरण और अध्ययन
- 2004 इंडियन ओशन सुनामी से पहले श्रीलंका और थाईलैंड में हाथी और अन्य जानवर ऊंचे इलाकों की ओर भाग गए थे।
- 2008 सिचुआन भूकंप (चीन) से पहले सांप सर्दियों में बिलों से बाहर निकल आए थे।
- जापान में 2011 के तोहोकू भूकंप से पहले मछलियां और पक्षी असामान्य व्यवहार दिखा रहे थे।
- भारत में भी कई बार (जैसे 2001 गुजरात भूकंप) लोगों ने कुत्तों और पक्षियों के असामान्य व्यवहार की रिपोर्ट की थी।
वैज्ञानिक नजरिया – क्या यह भविष्यवाणी है?
सेकंड्स पहले का व्यवहार (P-वेव्स के कारण) काफी पक्का है और अब कई देशों में जानवरों के व्यवहार को भूकंप अलर्ट सिस्टम में शामिल करने की रिसर्च चल रही है। लेकिन घंटों या दिनों पहले का व्यवहार अभी पूरी तरह सिद्ध नहीं है – कई बार संयोग भी हो सकता है। USGS और अन्य संस्थाएं कहती हैं कि जानवरों का व्यवहार भूकंप पूर्वानुमान के लिए 100% विश्वसनीय नहीं, लेकिन यह महत्वपूर्ण सुराग दे सकता है। भविष्य में सेंसर-आधारित सिस्टम (जैसे जानवरों पर लगे मॉनिटर) से बेहतर अलर्ट संभव हो सकता है।
निष्कर्ष
जानवरों की इंद्रियां इंसानों से कहीं ज्यादा संवेदनशील होती हैं। वे ऐसी छोटी कंपन, ध्वनियां, गैसें और विद्युत बदलाव महसूस कर लेते हैं जो हमें पता नहीं चलते। यह कोई जादू या "छठी इंद्रिय" नहीं, बल्कि लाखों सालों की विकास प्रक्रिया का नतीजा है जो उन्हें खतरे से बचाने में मदद करता है। अगली बार जब आपका पालतू कुत्ता अचानक बेचैन हो जाए या पक्षी अजीब व्यवहार करें, तो शायद प्रकृति आपको एक छोटा संकेत दे रही हो। हमें इन संकेतों को समझना और सम्मान करना चाहिए।