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Firehawks आग से नहीं डरता – ऑस्ट्रेलिया का अनोखा पक्षी

कल्पना कीजिए एक पक्षी जो आग से डरता नहीं, बल्कि आग को अपना हथियार बनाता है! ऑस्ट्रेलिया के उष्णकटिबंधीय सवाना में "फायरहॉक" (Firehawk) नाम से मशहूर पक्षी आग के सामने बिल्कुल निडर होते हैं। ये पक्षी जलती हुई लकड़ियां या जलते टहनियां चोंच या पंजों में पकड़कर सैकड़ों मीटर दूर ले जाते हैं और अनबर्न्ट घास में फेंक देते हैं – नई आग लगाकर शिकार को बाहर निकालने के लिए। यह व्यवहार इंसानों के अलावा प्रकृति में आग का इस्तेमाल करने वाला एकमात्र ज्ञात जानवर है।

Firehawks कौन हैं?

"फायरहॉक" कोई एक पक्षी नहीं, बल्कि तीन रैप्टर (शिकारी पक्षियों) का सामूहिक नाम है:

  • ब्लैक काइट (Black Kite - Milvus migrans): सबसे आम, छोटा लेकिन बहुत चालाक।
  • व्हिसलिंग काइट (Whistling Kite - Haliastur sphenurus): सीटी जैसी आवाज के लिए मशहूर।
  • ब्राउन फाल्कन (Brown Falcon - Falco berigora): तेज़ उड़ान वाला।

ये तीनों ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी क्षेत्रों (Northern Territory, Queensland, Western Australia) में पाए जाते हैं, जहां जंगल की आग (bushfires) बहुत आम हैं। आदिवासी (Aboriginal) लोग इन्हें हजारों साल से "फायरहॉक" कहते आए हैं और उनकी कहानियों में ये पक्षी आग चुराने वाले या आग देने वाले देवता जैसे हैं।

आग से डर क्यों नहीं?

ये पक्षी आग के आसपास उड़ते हैं, आग के किनारे पर बैठते हैं और जलते हुए शिकार (जैसे चूहे, सांप, छिपकली, कीड़े) को पकड़ते हैं। लेकिन ये सिर्फ इंतजार नहीं करते – वे सक्रिय रूप से आग फैलाते हैं:

  • जलती लकड़ी या कोयला चोंच/पंजों में पकड़कर उड़ते हैं।
  • अनबर्न्ट इलाके में फेंककर नई आग लगाते हैं।
  • भागते हुए शिकार पर झपट्टा मारते हैं।

2017 के एक अध्ययन (Journal of Ethnobiology) में 12+ घटनाओं की पुष्टि हुई, जहां आदिवासी, फायरफाइटर्स और वैज्ञानिकों ने इसे देखा। एक बार फायरफाइटर्स ने देखा कि पक्षी आग को नदी पार कराकर फैला रहे थे!

आदिवासी ज्ञान और वैज्ञानिक प्रमाण

ऑस्ट्रेलिया के आदिवासी (Aboriginal peoples) हजारों साल से ये कहानियां सुना रहे थे – कि फायरहॉक आग चुराते हैं और शिकार के लिए इस्तेमाल करते हैं। 2011-2017 तक रिसर्चर्स (Mark Bonta, Bob Gosford आदि) ने आदिवासियों, फायर रेंजर्स और अन्य लोगों से 100+ इंटरव्यू लिए और पुष्टि की कि यह सच है। यह इंसानों के अलावा आग को "टूल" की तरह इस्तेमाल करने का दुर्लभ उदाहरण है।

खतरे और प्रभाव

ये पक्षी आग को फैलाकर इंसानों के लिए समस्या भी पैदा करते हैं – आग नदी या फायरब्रेक पार कर जाती है। लेकिन ये पारिस्थितिकी के लिए जरूरी हैं – आग से भागते शिकार से पक्षियों को भोजन मिलता है। जलवायु परिवर्तन से आग ज्यादा तेज़ हो रही है, जिससे इन पक्षियों का शिकार प्रभावित हो सकता है।

निष्कर्ष

फायरहॉक आग से नहीं डरता – बल्कि आग को अपना दोस्त मानता है। यह प्रकृति की अद्भुत बुद्धिमत्ता दिखाता है कि कैसे एक पक्षी आग को हथियार बनाकर जीवित रहता है। ऑस्ट्रेलिया की ये "फायरहॉक" हमें याद दिलाते हैं कि प्रकृति में इंसान अकेला नहीं है जो आग का इस्तेमाल करता है – पक्षी भी लाखों सालों से इसे समझ चुके हैं। अगली बार जब आप जंगल की आग के बारे में सुनें, तो सोचिए – शायद कोई फायरहॉक ऊपर उड़ रहा हो!

स्रोत: Journal of Ethnobiology (2017), National Geographic, The Wildlife Society, WWF, और हालिया 2025-2026 रिपोर्ट्स।