एम्परर पेंगुइन महीनों तक भूखा रहता है, सिर्फ इसलिए कि उसका बच्चा ज़िंदा रह सके
अंटार्कटिका की बर्फीली हवाओं में, जहां तापमान -60°C तक गिर जाता है और हवा 200 किमी/घंटा की रफ्तार से चलती है, वहां एक पिता अपना सब कुछ दांव पर लगा देता है। एम्परर पेंगुइन (Aptenodytes forsteri) का नर पिता 2 से 4 महीने तक बिना एक कौर खाए खड़ा रहता है – सिर्फ इसलिए कि उसका बच्चा जीवित रह सके। यह प्रकृति का सबसे बड़ा पैतृक समर्पण है, जहां पिता खुद को भूख, ठंड और मौत के मुंह में डालकर भी बच्चे की रक्षा करता है।
एम्परर पेंगुइन की प्रजनन प्रक्रिया – एक अनोखी कहानी
एम्परर पेंगुइन का प्रजनन चक्र अप्रैल-मई में शुरू होता है। मादा एक बड़ा अंडा देती है (लगभग 450 ग्राम) और फिर समुद्र में भोजन के लिए चली जाती है – वह 2-3 महीने तक नहीं लौटती। अब जिम्मेदारी पूरी तरह नर पिता पर आ जाती है।
- नर अंडे को अपने पैरों पर रखता है और पेट की त्वचा की एक विशेष परत (brood pouch) से ढक लेता है – यह परत 35-37°C का तापमान बनाए रखती है।
- वह हफ्तों तक एक ही जगह पर खड़ा रहता है, सिर्फ हल्के-हल्के कदमों से चलता है ताकि अंडा गिरे नहीं।
- इस दौरान वह कुछ नहीं खाता – अपना शरीर का फैट (blubber) जलाता है। औसतन 40% वजन खो देता है (कभी-कभी 50% तक)।
कितनी बड़ी कुर्बानी?
2 महीने में नर पेंगुइन 10-15 किलो वजन खो देता है। ठंड इतनी तेज़ होती है कि उसके पंख जम जाते हैं, पैर फट जाते हैं, और शरीर की ऊर्जा खत्म होने लगती है। अगर मादा समय पर नहीं लौटती, तो पिता मर भी सकता है। लेकिन वह रुकता नहीं – क्योंकि बच्चा निकलने पर उसे दूध जैसा पदार्थ (crop milk) खिलाना होता है, जो उसके पेट में बनता है।
जब बच्चा निकलता है (जून-जुलाई में), तो वह बहुत कमजोर होता है। पिता उसे भी brood pouch में रखता है और मादा के लौटने तक उसे गर्म रखता है। मादा लौटकर पिता को भोजन रेगुरजिटेट (उगलकर) खिलाती है, और तब जाकर पिता समुद्र की ओर जाता है – महीनों बाद पहली बार खाने के लिए।
क्यों इतना बड़ा त्याग?
- अंटार्कटिका में सर्दी बहुत लंबी और कठोर होती है – कोई पेड़ या आश्रय नहीं, सिर्फ बर्फ।
- अंडा जमीन पर रखने से ठंड में फट जाता, इसलिए पिता का शरीर ही "घोंसला" बनता है।
- यह व्यवहार लाखों सालों के विकास से आया है – जो पिता ऐसा नहीं करते, उनके बच्चे मर जाते हैं, इसलिए यह जीन आगे बढ़ता है।
वर्तमान चुनौतियां और संरक्षण
जलवायु परिवर्तन से समुद्र का बर्फ कम हो रहा है, जिससे एम्परर पेंगुइन की कॉलोनियां खतरे में हैं। 2022-2025 के अध्ययनों में पाया गया कि कई कॉलोनियां 50% तक कम हो गई हैं। WWF और Antarctic Treaty के तहत संरक्षण चल रहा है, लेकिन ग्लोबल वार्मिंग रोकना सबसे बड़ा कदम है।
निष्कर्ष
एम्परर पेंगुइन पिता की यह कहानी हमें सिखाती है कि प्यार और जिम्मेदारी में कोई सीमा नहीं होती। वह खुद भूखा, ठंडा और थका रहता है, सिर्फ इसलिए कि उसका बच्चा ज़िंदा रहे और बड़ा हो सके। प्रकृति में ऐसे कई उदाहरण हैं, लेकिन एम्परर पेंगुइन का यह त्याग सबसे बड़ा और सबसे भावुक है। हमें भी अपनी धरती और आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐसा ही समर्पण दिखाना होगा।