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मैंग्रोव जंगल दुनिया के सबसे उत्पादक और महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक हैं। ये तटीय क्षेत्रों की रक्षा करते हैं, जैव विविधता को बढ़ावा देते हैं और जलवायु परिवर्तन से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन मानवीय गतिविधियों के कारण इनका तेजी से विनाश हो रहा है। यह लेख मैंग्रोव के वैज्ञानिक महत्व, लाभों, विनाश के कारणों, प्रभावों और संरक्षण प्रयासों पर विस्तार से चर्चा करता है।
मैंग्रोव नमकीन या खारा पानी में जीवित रहने में सक्षम विशेष पेड़ों और झाड़ियों का समूह है। ये मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय और उप-उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के तटीय भागों, नदियों के मुहाने और दलदली क्षेत्रों में पाए जाते हैं। विश्व में लगभग 70-80 प्रजातियाँ हैं, जिनमें प्रमुख हैं राइजोफोरा (Rhizophora), एविसेनिया (Avicennia) और सोनेरेटिया (Sonneratia)।
मैंग्रोव की सबसे अनोखी विशेषता उनकी जड़ें हैं। ये हवाई जड़ें (प्न्यूमेटोफोर्स) या स्टिल्ट जड़ें विकसित करती हैं जो कीचड़ में ऑक्सीजन लेने और पेड़ को स्थिर रखने में मदद करती हैं। ये जड़ें पानी के ऊपर उठी रहती हैं और जटिल नेटवर्क बनाती हैं जो मछलियों और अन्य जीवों के लिए आश्रय प्रदान करती हैं।
भारत में मैंग्रोव मुख्य रूप से सुंदरबन (पश्चिम बंगाल), भितरकनिका (ओडिशा), अंडमान-निकोबार और गुजरात के तटीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं। सुंदरबन विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव जंगल है और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
उदाहरण इमेज (स्वस्थ मैंग्रोव जंगल की हवाई दृश्य):
इमेज लिंक 1: हवाई दृश्य में मैंग्रोव की जड़ेंमैंग्रोव लहरों की ऊर्जा को 75-90% तक कम कर देते हैं। 2004 की भारतीय महासागरीय सुनामी में मैंग्रोव वाले क्षेत्रों में जान-माल की क्षति बहुत कम हुई थी। ये मिट्टी के कटाव को रोकते हैं और तट रेखा को स्थिर रखते हैं।
मैंग्रोव प्रति हेक्टेयर अन्य जंगलों से 3-5 गुना अधिक कार्बन संग्रहित करते हैं। इनकी मिट्टी में सदियों पुराना कार्बन जमा होता है। ये जलवायु परिवर्तन के खिलाफ सबसे प्रभावी प्राकृतिक हथियार हैं।
ये हजारों प्रजातियों का घर हैं – मछलियाँ, केकड़े, झींगे, पक्षी (जैसे किंगफिशर, हेरॉन), स्तनधारी (बाघ, हिरण) और सरीसृप। विश्व की लगभग 35% व्यावसायिक मछलियाँ मैंग्रोव पर निर्भर हैं क्योंकि ये नर्सरी का काम करते हैं।
तटीय समुदायों को मछली पकड़ने, शहद संग्रह, लकड़ी और पर्यटन से रोजगार मिलता है। एक हेक्टेयर मैंग्रोव का वार्षिक आर्थिक मूल्य $10,000 से $40,000 तक हो सकता है।
मैंग्रोव प्रदूषकों को फिल्टर करते हैं और पानी की गुणवत्ता बनाए रखते हैं।
पिछले 100 वर्षों में विश्व के 50% से अधिक मैंग्रोव नष्ट हो चुके हैं। 1980 से 2000 के बीच 35% का नुकसान हुआ। वर्तमान में प्रतिवर्ष 1-2% की दर से विनाश जारी है।
उदाहरण इमेज (विनाशित क्षेत्र):
इमेज लिंक 5: इंडोनेशिया में झींगा फार्मिंग से विनाशविश्व स्तर पर मैंग्रोव संरक्षण को महत्व दिया जा रहा है:
रोपण में सफलता दर बढ़ाने के लिए सही जगह, सही प्रजाति और समुदाय की भागीदारी जरूरी है।
उदाहरण इमेज (संरक्षण और रोपण):
इमेज लिंक 8: स्वयंसेवक मैंग्रोव रोपण करते हुएमैंग्रोव विकास के दुश्मन नहीं, बल्कि सतत विकास के सहायक हैं। इनकी रक्षा करके हम तटीय सुरक्षा, आजीविका और जलवायु संरक्षण सुनिश्चित कर सकते हैं। हर व्यक्ति छोटे स्तर पर भी योगदान दे सकता है – प्लास्टिक कम करना, जागरूकता फैलाना और संरक्षण अभियानों में भाग लेना।