Image Credit : Generated By Chatgpt

भारतीय नदियों में डॉल्फिन क्यों तेजी से कम हो रही हैं? मुख्य कारण और वर्तमान स्थिति (2026 अपडेट)

गंगा डॉल्फिन (Platanista gangetica), जिसे भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया है, गंगा-ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र की सेहत का सबसे महत्वपूर्ण संकेतक है। लेकिन पिछले कुछ दशकों में मानवीय गतिविधियों के कारण इसकी संख्या बहुत तेजी से घट रही है। वन्यजीव संस्थान ऑफ इंडिया (WII) द्वारा 2021-2023 के सर्वेक्षण (2025 में जारी) और 2026 के अपडेट के अनुसार, भारत में कुल लगभग 6,324 गंगा डॉल्फिन बची हैं (रेंज: 5,977–6,688)।

संख्या घटने के मुख्य कारण

  1. प्रदूषण
    औद्योगिक कचरा, कीटनाशक, खेती के रसायन और बिना शोधन वाला सीवेज नदियों में घुलनशील ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen) को बहुत कम कर देता है। डॉल्फिन को साफ और ऑक्सीजन युक्त पानी चाहिए। कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज जैसे शहरों में हाल के वर्षों में कई डॉल्फिन मौतें इसी कारण दर्ज की गई हैं।
  2. बांध और बैराज
    फरक्का, नरोरा, कोसी, गंगाजल जैसे 50 से अधिक बांध-बैरेज ने नदियों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दिया है। इससे डॉल्फिन का प्रवास रुक जाता है, शिकार कम मिलता है, और आनुवंशिक विविधता घटती है। बांध के ऊपरी हिस्सों में डॉल्फिन लगभग खत्म हो चुकी हैं।
  3. मछली पकड़ने के जाल में फंसना (Bycatch)
    गिल नेट और मोनोफिलामेंट जाल में फंसकर डॉल्फिन दम घुटने से मर जाती हैं। यह मौत का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष कारण है। उत्तर प्रदेश, बिहार और असम में हर साल दर्जनों मामले सामने आते हैं।
  4. रेत खनन और नदी प्रवाह में कमी
    अवैध रेत खनन से नदी की गहराई कम हो जाती है। डॉल्फिन को गहरे पानी की जरूरत होती है, खासकर सूखे के मौसम में। सिंचाई के लिए अत्यधिक पानी निकालने से नदियां उथली हो जाती हैं।
  5. अन्य मानवीय गतिविधियां
    नावों से होने वाला शोर-प्रदूषण (Noise Pollution) डॉल्फिन के इकोलोकेशन को प्रभावित करता है (डॉल्फिन आंखों से कम और ध्वनि से ज्यादा शिकार करती हैं)। कभी-कभी तेल के लिए शिकार, नावों से टकराव और जलवायु परिवर्तन से मुहाने क्षेत्रों में लवणता बढ़ना भी खतरा है।

वर्तमान स्थिति (2026 तक)

2025-2026 के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार:

  • मुख्य गंगा नदी: ≈ 3,275 डॉल्फिन
  • गंगा की सहायक नदियां: ≈ 2,414 डॉल्फिन
  • ब्रह्मपुत्र मुख्यधारा: ≈ 584 डॉल्फिन
  • सबसे अधिक संख्या वाले राज्य: उत्तर प्रदेश (2,397), बिहार (2,220), पश्चिम बंगाल (815), असम (635)

जहां नदियां बिना बांध वाली और संगम वाली हैं, वहां संख्या थोड़ी स्थिर या बढ़ी है, लेकिन बांधों के बीच के हिस्सों में डॉल्फिन लगभग गायब हैं।

संरक्षण के प्रयास

प्रोजेक्ट डॉल्फिन (2020 से शुरू), विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य, हानिकारक जालों पर प्रतिबंध, जागरूकता अभियान और प्रदूषण नियंत्रण जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। 2025 का सर्वेक्षण अब आधारभूत डेटा दे रहा है। लेकिन प्रदूषण रोकना, बांधों से पर्याप्त पानी छोड़ना और टिकाऊ मछली पकड़ने की नीतियां सबसे जरूरी हैं।

निष्कर्ष: गंगा डॉल्फिन को बचाना मतलब पूरी नदी पारिस्थितिकी को स्वस्थ रखना है। अगर हम नदियों को साफ, गहरी और बहती हुई बनाए रख सकें, तो 'सोंस' या 'शिहू' को बचाया जा सकता है। यह सिर्फ एक प्रजाति की नहीं, बल्कि हमारी पवित्र नदियों की लड़ाई है।

स्रोत: वन्यजीव संस्थान ऑफ इंडिया 2025-2026 सर्वे, WWF, IUCN, SANDRP रिपोर्ट्स और सरकारी अपडेट