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सोचिए… जब तापमान 50°C पार कर जाए और हवा आग की तरह चले, तब एक पक्षी ज़मीन के ऊपर नहीं—रेत के नीचे ठंडा रह रहा हो! यह Sandgrouse का कमाल है

रेगिस्तान में दोपहर का समय—तापमान 50°C से ऊपर, हवा जलाने वाली, रेत इतनी गर्म कि नंगे पैर चलना नामुमकिन। इंसान छाया ढूंढता है, पानी की तलाश करता है, लेकिन Sandgrouse (सैंडग्राउस) नाम का छोटा पक्षी बिल्कुल अलग रास्ता अपनाता है। वह ज़मीन पर नहीं—रेत के नीचे ठंडा रहता है। यह पक्षी सहारा, कलाहारी, थार और गोबी जैसे रेगिस्तानों में पाया जाता है और गर्मी से बचने की सबसे चतुर तकनीक अपनाता है।

रेत में ठंडक कैसे ढूंढता है Sandgrouse?

रेगिस्तान की रेत ऊपर से तपती है, लेकिन कुछ सेंटीमीटर नीचे तापमान काफी कम हो जाता है। Sandgrouse इस सिद्धांत का फायदा उठाता है:

  • दोपहर की सबसे तेज़ धूप में वह हल्का-सा गड्ढा (scrape) बनाता है—केवल 5-10 सेमी गहरा।
  • उसमें आधा शरीर दबा लेता है—सिर्फ सिर और गर्दन बाहर रहती है।
  • रेत की ऊपरी परत सूरज की गर्मी सोखती है, लेकिन नीचे की परत इन्सुलेटर की तरह काम करती है और ठंडक बनाए रखती है।
  • तापमान अंतर 20-30°C तक हो सकता है—ऊपर 55°C, नीचे 30-35°C।

यह व्यवहार "sand burrowing" या "substrate cooling" कहलाता है। पक्षी घंटों तक ऐसे ही बैठा रह सकता है।

शरीर का अनुकूलन – गर्मी से बचाव के लिए डिज़ाइन

Sandgrouse का शरीर रेगिस्तान के लिए परफेक्ट है:

  • हल्के रंग के पंख सूरज की रोशनी को परावर्तित (reflect) करते हैं।
  • पंखों के नीचे हवा की परत (air layer) इन्सुलेशन का काम करती है।
  • कम पसीना आता है, और सांस से पानी की हानि न्यूनतम।
  • लंबी टांगें और पंखों का फैलाव गर्म हवा से दूर रखता है।

पानी की समस्या – और उसका अनोखा समाधान

रेगिस्तान में पानी बहुत दूर होता है। Sandgrouse इसे भी हल करता है:

  • नर पक्षी सैकड़ों किलोमीटर उड़कर पानी तक जाता है।
  • अपने पेट के विशेष पंखों में पानी सोख लेता है (15-20 मिलीलीटर तक)।
  • फिर वापस घोंसले लौटकर बच्चों को पिलाता है—पंखों से पानी टपकता है, बच्चे चूस लेते हैं।

यह "water-carrying" व्यवहार दुनिया में बहुत दुर्लभ है।

जोखिम और संरक्षण

Sandgrouse की कई प्रजातियां Least Concern हैं, लेकिन कुछ (जैसे Tibetan Sandgrouse) Vulnerable हैं। मुख्य खतरा:

  • जलवायु परिवर्तन से पानी के स्रोतों का सूखना।
  • शिकार और अंडे इकट्ठा करना।
  • आवास हानि (रेगिस्तान में खनन और सड़कें)।

निष्कर्ष

Sandgrouse हमें सिखाता है कि जहाँ सब भागते हैं, वहाँ भी जीवन रास्ता खोज लेता है। रेत के नीचे ठंड ढूंढना, पानी सोखकर बच्चों तक पहुँचाना, और शरीर को गर्मी से बचाना—यह सब मिलकर इसे रेगिस्तान का असली सर्वाइवर बनाता है। प्रकृति हमें याद दिलाती है: जीवित रहने के लिए हमेशा भागना ज़रूरी नहीं, कभी-कभी बस सही जगह बैठना काफी होता है।

स्रोत: Cornell Lab of Ornithology, Journal of Avian Biology, BirdLife International, National Geographic, और हालिया 2025-2026 sandgrouse thermoregulation अध्ययन।