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सोचिए… तपता हुआ रेगिस्तान, चारों तरफ रेत का समंदर, और महीनों तक एक बूंद पानी नहीं—फिर भी एक पक्षी ज़िंदा रहता है। यह है Sandgrouse

रेगिस्तान में जीवन लगभग असंभव लगता है—तापमान 45-50°C तक पहुँचता है, पानी महीनों तक नहीं मिलता, और हर तरफ सिर्फ जलती रेत। लेकिन इसी कठोर माहौल में Sandgrouse (सैंडग्राउस) नाम का छोटा-सा पक्षी सहजता से रहता है। यह पक्षी अफ्रीका, मध्य पूर्व और एशिया के रेगिस्तानों (सहारा, कलाहारी, गोबी, थार आदि) में पाया जाता है। यह न सिर्फ जीवित रहता है, बल्कि अपने बच्चों को भी दूर-दूर से पानी पहुँचाता है—एक ऐसी क्षमता जो प्रकृति की सबसे अनोखी रणनीतियों में से एक है।

Sandgrouse का जीवन – रेगिस्तान में अनुकूलन

Sandgrouse (परिवार Pteroclidae) में 16 प्रजातियां हैं—जैसे Namaqua Sandgrouse, Pin-tailed Sandgrouse, Spotted Sandgrouse आदि। ये पक्षी:

  • बीज, छोटे पौधे और सूखे घास खाते हैं—जिनमें बहुत कम नमी होती है, लेकिन उनके लिए काफी।
  • शरीर में पानी बचाने के लिए कम पसीना आता है, मल में पानी कम निकलता है, और सांस से पानी की हानि न्यूनतम रखते हैं।
  • दिन में छाया में आराम करते हैं और शाम को सक्रिय होते हैं।

सबसे अनोखी क्षमता – पानी का परिवहन

सैंडग्राउस के नर की सबसे कमाल की विशेषता उसके पेट के पंख हैं। ये पंख विशेष रूप से बनाए गए हैं—जैसे स्पंज या कपास। जब नर पानी के स्रोत (जो अक्सर 30-80 किमी दूर होता है) पहुँचता है, तो:

  • वह पेट के पंखों को पानी में डुबोता है।
  • पंख 15-20 मिलीलीटर तक पानी सोख लेते हैं (एक छोटे गिलास जितना)।
  • फिर वह उड़कर घोंसले तक लौटता है—पानी बिना गिरे रहता है क्योंकि पंखों में केशिका क्रिया (capillary action) काम करती है।
  • घोंसले पर पहुँचकर वह बच्चों को बुलाता है—बच्चे पंखों से पानी चूस लेते हैं।

यह प्रक्रिया हर 2-3 दिन में होती है, और बच्चे 3-4 हफ्ते तक इसी पर निर्भर रहते हैं।

अंडे और बच्चे – प्रकृति का इंतजाम

मादा 2-3 अंडे देती है। घोंसला ज़मीन पर खुला होता है—रेत में छोटा गड्ढा। अंडे रेत के रंग से मिलते-जुलते होते हैं, जिससे शिकारी आसानी से नहीं देख पाते। बच्चे जन्म से ही "precocial" होते हैं—आँखें खुली, पंख विकसित, और कुछ ही घंटों में चलने-दौड़ने लगते हैं।

जोखिम और संरक्षण

Sandgrouse की कई प्रजातियां Least Concern हैं, लेकिन कुछ (जैसे Tibetan Sandgrouse) Vulnerable हैं। खतरे:

  • जलवायु परिवर्तन से पानी के स्रोतों का सूखना।
  • शिकार और अंडे इकट्ठा करना।
  • आवास हानि (रेगिस्तान में खनन और खेती)।

निष्कर्ष

Sandgrouse रेगिस्तान में जीवन की सबसे बड़ी मिसाल है—जहाँ पानी नहीं, वहाँ भी जीवन रास्ता खोज लेता है। नर का पानी सोखकर बच्चों तक पहुँचाना, शरीर का पानी बचाना और प्रकृति के साथ तालमेल—यह सब मिलकर इसे रेगिस्तान का असली सर्वाइवर बनाता है। यह पक्षी हमें सिखाता है कि कठोर हालात में भी अनुकूलन, समझदारी और समर्पण से कुछ भी संभव है। जहाँ सब हार मान लें, वहाँ सैंडग्राउस उड़ता रहता है।

स्रोत: Cornell Lab of Ornithology, BirdLife International, Journal of Avian Biology, National Geographic, और हालिया 2025-2026 sandgrouse ecology रिपोर्ट्स।