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सोचिए… जहाँ इंसान खड़े होने से भी डर जाए, वहाँ एक पक्षी अपना घर बसाता है—ज्वालामुखी की राख में! यह है Maleo

इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप पर ज्वालामुखी की गर्म राख और भाप से भरी ज़मीन है—जहाँ तापमान 40-50°C तक रहता है, और इंसान लंबे समय तक खड़े रहना भी मुश्किल मानते हैं। लेकिन इसी खतरनाक जगह पर Maleo (Macrocephalon maleo) नाम का दुर्लभ पक्षी अपना प्रजनन करता है। यह पक्षी अंडों पर कभी नहीं बैठता—फिर भी उसके बच्चे पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत पैदा होते हैं। Maleo प्रकृति को ही अपना इनक्यूबेटर बना लेता है।

Maleo का जीवन और प्रजनन – ज्वालामुखी का रहस्य

Maleo मेगापोड परिवार का सदस्य है, लेकिन इसकी प्रजनन रणनीति सबसे अनोखी है। यह पक्षी:

  • केवल ज्वालामुखी के किनारे, गर्म रेत या भू-तापीय (geothermal) क्षेत्रों में घोंसला बनाता है।
  • नर और मादा मिलकर 1-1.5 मीटर गहरा गड्ढा खोदते हैं।
  • मादा 8-12 बड़े अंडे (लगभग 200-250 ग्राम वजन के) देती है—सामान्य मुर्गी के अंडे से 4-5 गुना बड़े।
  • अंडों को रेत में दबाकर मिट्टी से ढक देते हैं।
  • ज्वालामुखी की प्राकृतिक गर्मी (33-38°C) अंडों को सेती है—यह काम 60-80 दिनों तक चलता है।

बच्चे का जन्म – जन्म से ही स्वतंत्र

जब बच्चे निकलते हैं, तो वे:

  • खुद रेत खोदकर बाहर आते हैं—माता-पिता कहीं नहीं होते।
  • पंख, पूंछ और आँखें पूरी तरह विकसित होती हैं।
  • जन्म के कुछ ही घंटों में दौड़ते और उड़ते हैं।
  • खुद भोजन ढूंढते हैं—कीड़े, बीज, छोटे फल।

यह "precocial" विकास है—बच्चे जन्म से ही आत्मनिर्भर होते हैं। माता-पिता सिर्फ अंडे दबाने और टीले की देखभाल तक सीमित रहते हैं।

जोखिम और चुनौतियां – प्रकृति का खेल

यह तरीका बहुत जोखिम भरा है:

  • अगर तापमान 2-3 डिग्री ऊपर-नीचे हो जाए, तो पूरा घोंसला नष्ट हो सकता है।
  • ज्वालामुखी विस्फोट, भूकंप या बारिश से रेत ढक सकती है।
  • आक्रामक प्रजातियां (जैसे जंगली सूअर, कुत्ते) और इंसान अंडे निकालकर खा लेते हैं।

इसलिए Maleo की कई कॉलोनियां खतरे में हैं। IUCN इसे Critically Endangered मानता है—केवल कुछ हजार बचे हैं।

संरक्षण के प्रयास

इंडोनेशिया सरकार और NGOs जैसे Wildlife Conservation Society और BirdLife International Maleo के लिए काम कर रहे हैं:

  • घोंसला क्षेत्रों की सुरक्षा।
  • कृत्रिम इनक्यूबेटर बनाकर अंडे बचाना।
  • स्थानीय समुदायों को जागरूक करना कि अंडे न खाएं।

निष्कर्ष

Maleo की कहानी बताती है कि प्रकृति सिर्फ सुरक्षित जगहों पर ही जीवन नहीं देती—वह कठिन, तपती राख में भी नया आरंभ खोज लेती है। जहाँ सबको विनाश दिखता है, वहीं वह जीवन की संभावना छुपा देती है। Maleo हमें सिखाता है कि विश्वास और प्रकृति पर छोड़ना भी एक बड़ी ताकत है—कभी-कभी सबसे खतरनाक जगह ही सबसे सुरक्षित घोंसला बन जाती है।

स्रोत: BirdLife International, IUCN Red List, Indonesian Ornithological Society, National Geographic, और हालिया 2025-2026 Maleo conservation रिपोर्ट्स।