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बिना GPS, बिना मैप… फिर भी पक्षी हज़ारों किलोमीटर दूर अपना रास्ता कभी नहीं भूलते—आख़िर कैसे?

हर साल लाखों पक्षी उत्तरी गोलार्ध से दक्षिण की ओर और वापस हजारों किलोमीटर की यात्रा करते हैं – बिना GPS, बिना मैप, बिना कोई ऐप। Arctic Tern तो हर साल 70,000 से 90,000 किमी की यात्रा करता है – यानी पृथ्वी की परिधि से दोगुनी दूरी! यह कोई जादू नहीं, बल्कि प्रकृति का सबसे सटीक और बहु-स्तरीय नेविगेशन सिस्टम है। पक्षी कई संकेतों को एक साथ इस्तेमाल करते हैं – जैसे सूरज, तारे, चुंबकीय क्षेत्र, गंध, लैंडमार्क और अपनी इनबिल्ट "बायोलॉजिकल क्लॉक"।

1. सूरज कम्पास – दिन का सबसे बड़ा गाइड

पक्षी सूरज को कम्पास की तरह इस्तेमाल करते हैं। वे जानते हैं कि सूरज सुबह पूर्व में उगता है, दोपहर में दक्षिण में होता है, और शाम पश्चिम में ढलता है। लेकिन सूरज की पोजीशन बदलती रहती है, इसलिए पक्षियों के पास एक आंतरिक घड़ी (circadian clock) होती है जो समय के साथ सूरज की स्थिति को एडजस्ट करती है।

प्रयोगों में पाया गया कि अगर पक्षी की आंतरिक घड़ी गड़बड़ कर दी जाए (जैसे कृत्रिम रोशनी से), तो वे दिशा भटक जाते हैं। European Starling और homing pigeons पर हुए अध्ययन इसकी पुष्टि करते हैं।

2. तारे – रात का नक्शा

रात में सूरज नहीं होता, तो पक्षी तारों के पैटर्न से दिशा पकड़ते हैं। Indigo Bunting जैसे पक्षी उत्तर तारे (Polaris) के आसपास घूमते तारों को देखकर उत्तर दिशा तय करते हैं। प्रयोगों में जब उन्हें प्लैनेटेरियम में दिखाया गया, तो वे तारों के रोटेशन के अनुसार दिशा बदल लेते थे।

3. पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र – इनबिल्ट मैग्नेटिक मैप

यह सबसे हैरान करने वाला हिस्सा है। कई पक्षियों (जैसे European Robin, homing pigeons) की आँखों में क्रिप्टोक्रोम प्रोटीन और चोंच में मैग्नेटाइट क्रिस्टल होते हैं। ये उन्हें पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता और झुकाव (inclination) "दिखाते" हैं – जैसे एक 3D मैप।

अध्ययनों में जब चुंबकीय क्षेत्र को कृत्रिम रूप से बदल दिया गया, तो पक्षी दिशा भटक गए। European Robin पर 2007 और 2018 के अध्ययनों में पाया गया कि वे अंधेरे में भी चुंबकीय संकेतों से सही दिशा चुन लेते हैं।

4. गंध, लैंडमार्क और अनुभव

पक्षी गंध से भी रास्ता ढूंढते हैं – समुद्र की हवा, जंगल की महक, नमक की गंध। वे नदियों, पहाड़ों, तटरेखाओं और शहरों को लैंडमार्क की तरह याद रखते हैं। पहली यात्रा में युवा पक्षी अनुभवी पक्षियों के साथ जाते हैं और रास्ता सीखते हैं। हर साल यात्रा के साथ उनका "मेंटल मैप" और सटीक होता जाता है।

कुछ प्रसिद्ध उदाहरण

  • Arctic Tern: ध्रुव से ध्रुव तक 90,000 किमी – सबसे लंबी प्रवास यात्रा।
  • Bar-tailed Godwit: अलास्का से न्यूजीलैंड तक बिना रुके 11,000 किमी उड़ान।
  • European Robin: चुंबकीय क्षेत्र से दिशा तय करने का सबसे ज्यादा अध्ययन हुआ।
  • Homing Pigeon: सैकड़ों किमी दूर छोड़े जाने पर भी घर लौट आते हैं।

निष्कर्ष

पक्षी सूरज, तारे, चुंबकीय क्षेत्र, गंध और अनुभव को एक साथ इस्तेमाल करके एक परफेक्ट नेविगेशन सिस्टम बनाते हैं। इंसान ने GPS बनाया, लेकिन पक्षी पूरी धरती को अपना नक्शा बना लेते हैं – बिना बैटरी, बिना सिग्नल, बिना एरर। सवाल बस इतना है: जब प्रकृति इतना सटीक रास्ता दिखा सकती है, तो हम उससे सीख क्यों नहीं लेते? शायद हमें भी कभी-कभी "अंदर की आवाज़" और प्रकृति के संकेतों पर भरोसा करना चाहिए।

स्रोत: Nature, Proceedings of the National Academy of Sciences, Cornell Lab of Ornithology, Max Planck Institute, और हालिया 2025-2026 migration navigation अध्ययन।